मेरे प्यारे साधक भाइयो यह साधना अपने आप में अति श्रेष्ठ साधना हैं जग मोहिनी,निर्भयता,धनप्राप्ति,प् रसिद्धि जिसके साथ तुम्हारी नजर मिले वह तुम्हारा हो जाये ! सबसे बड़ी बात आत्मसाक्षात्कार,साधनाओ में सफलता और क्या क्या लिखू इस साधना के विषय में ? हर साधक को अपने जीवन में यह साधना एक बार जरूर करनी ही चाहिए ! आप खुद करके देखे और अनुभव लीजिए !

।। मन्त्र ।।
ॐ सः सूर्याय सहस्त्र किर्नाय मम वान्छितम देहि देहि स्वाहा !
।। विधि ।।
इस मन्त्र को आप किसी भी रविवार से शुरू कर सकते है ! प्रातः सूर्योदय के साथ गुरु और गणेश का स्मरण कर इस साधना को शुरू कर दे ! लाल आसन पर लाल वस्त्र पहनकर स्फटिक की माला से पूर्व मुखी होकर इसका जाप शुरू करे ! इस मन्त्र का आपको सवालाख जाप करना है ! यह क्रिया आपको 40 दिन करनी है ! जितना जाप पहले दिन किया है उतना ही दुसरे दिन करे ! जाप को घटाए या बढ़ाये नहीं ! उसके बाद दशांश हवन जरूर करे, उसके बाद अनुभव करे अपनी जिंदगी में होने वाले बदलाव को और आनंद लीजिये !
इस मन्त्र को आप किसी भी रविवार से शुरू कर सकते है ! प्रातः सूर्योदय के साथ गुरु और गणेश का स्मरण कर इस साधना को शुरू कर दे ! लाल आसन पर लाल वस्त्र पहनकर स्फटिक की माला से पूर्व मुखी होकर इसका जाप शुरू करे ! इस मन्त्र का आपको सवालाख जाप करना है ! यह क्रिया आपको 40 दिन करनी है ! जितना जाप पहले दिन किया है उतना ही दुसरे दिन करे ! जाप को घटाए या बढ़ाये नहीं ! उसके बाद दशांश हवन जरूर करे, उसके बाद अनुभव करे अपनी जिंदगी में होने वाले बदलाव को और आनंद लीजिये !
जय सद्गुरुदेव !

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