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बाघ नख

 ईश्वर के द्वारा बनाई कोई भी वस्तु व्यर्थ नही है , उनके द्वारा रचित सृष्टि में जो जहरीले पौधे हैं वे भी तंत्र में उपयोगी हैं ! तंत्र में ही नहीं  वनस्पति आम जीवन में भी बहुत उपयोगी है ,इसी प्रकार ईश्वर द्वारा रचित पशु पक्षी और जीव जन्तुओ का प्रत्येक अंग  के उपयोगों का कई तंत्र ग्रंथों में उल्लेख मिलता है ! कई विद्वानों ने इस पर शोध कर पशु पक्षिओ पर किताबे लिखी हैं ! यहाँ तक कि भगवान् विष्णु ने वाराह अवतार लिया इसलिए शूकर दन्त का उपयोग वराह दन्त के रूप में किया जाता है ! इसी प्रकार उल्लू को माँ लक्ष्मी की सवारी  माना जाता है और उनके भी प्रत्येक अंग का उपयोग तंत्र में किया जाता है ! उल्लू तंत्र और कौवा तंत्र पर तो इतने ग्रन्थ लिखे गये हैं कि एक जन्म अधूरा पढ़ जाए इन रहस्यमय पक्षिओ को जानने के लिए ! इसी प्रकार बाघ के नाखून का भी तंत्र में बहुत अधिक उपयोग किया जाता है ! बाघ के नाखून को यदि सिद्ध कर गले में धारण कर  लिया जाए तो शत्रु मूक होकर व्यक्ति को देखते रह जाते हैं और यदि बाघ के बालो और खाल को विशेष मन्त्रों द्वारा अभिमंत्रित कर यंत्रों के साथ गले में धारण कर लिया जाए तो तुरंत कार्य सिद्धि होती है ! मुकद्दमे में जीतने के लिए और शत्रु पक्ष के स्तम्भन के लिए भी बाघ का नख गले में धारण किया जाता है ! बाघ नख के अनेको विचित्र प्रयोग हैं  इस बाघ नख के उपयोग द्वारा भगवान् नरसिंह का आवाहन कर शत्रु का वध भी किया जा सकता हैं और इसी एक बाघ नख द्वारा घर अथवा ग्राम की सीमा को बाँधा भी जा सकता है ! इस प्रकार बंधन करने से स्वयं भगवान् नरसिंह उस स्थान की रक्षा करते हैं और साधक को निर्भयता प्रदान करते हैं !

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मंत्र !!

नरसिंह वीर महाबलवीर मारे वैरी पकड़ के सिर
मेरा भेजा जाये  वैरी दुश्मन का कलेजा खाये 
मेरा भेजा ना जाये तो माता कालका की सेज पर लत्त खाके गिर जाएँ 
चलेगा मंत्र फुरेगा वाचा  आओ नरसिंह वीर देखा तेरे इल्म का तमाशा 
मेरे गुरु का शब्द सांचा !
दुहाई गुरु गोरखनाथ की
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विधि !!इस मंत्र को 21 दिन  प्रतिदिन 1100 बार जपने पर सिद्ध हो जाएगा , प्रतिदिन भगवान् नरसिंह को पुए ( गुलगुले ) का भोग लगायें और धुप दीप जला कर इस मंत्र का जप करें !


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प्रयोग विधि !!
बाघ नख पर इस मंत्र का पूर्ण विधि विधान से प्रतिदिन 1100 बार 11 दिन जप करें , इससे बाघ नख सिद्ध हो जाएगा और इसे गले में धारण करने से आपका प्रत्येक कार्य सिद्ध हो जाएगा !

चेतावनी :----  शेर अथवा बाघ संरक्षित पशुओं की श्रेणी में आते हैं ! इस विधि का उल्लेख करना मात्र परम्परागत ज्ञान को आगे बढ़ाना है !

जय सदगुरुदेव !

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