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छपार का मेला

 पंजाब के जिला लुधियाना का नाम तो सबने सुना होगा , कहा जाता है कि इब्राहीम लोधी को लुधियाना बहुत पसंद था ! वह कई बार लुधियाना घुमने आता था ! उसके बार बार इस जगह आने से इस जगह लो लोग "लोधी आना, लोधी आना" कहने लगे , धीरे धीरे इस जगह का नाम ही लुधियाना हो गया ! पंजाब तो सदा से ही पीरों फकीरों की धरती रहा है , हर रोज पंजाब में कही कही किसी किसी पीर फकीर का मेला होता है पर इन सभी मेलों में छपार का मेला और जरग का मेला सबसे बड़ा मेला है !


छपार के मेले में पंजाब अपने असली रंग में नज़र आता है ! यह मेला भादो शुक्ल चौदस को मनाया जाता है , इस रात लोग मंदिर में सारी रात जाहरवीर बाबा का गुणगान करते है और बाबा जी की चौंकी भरते है


इस मेले से सम्बंधित अनेक कथाये प्रचलित है , कहा जाता है कि जब जाहरवीर बाबा का उनके दो चचेरे भाइयों, अर्जन और सर्जन, के साथ युद्ध हुआ तो जाहरवीर बाबा ने उन दोनों को मार गिराया था ! इस युद्ध में दिल्ली के बादशाह ने अर्जन सर्जन की मदद की पर जब वह दोनों युद्ध में मारे गए तो दिल्ली के बादशाह ने जाहरवीर बाबा से क्षमा मांग ली ! जाहरवीर बाबा ने उन्हे माफ़ करते हुए कहा कि आने वाले समय में जब भी कोई भगत मेरे दर्शनों के लिए दिल्ली से आएगा तो उसकी पीठ पर पीले रंग का हाथ के पंजे का निशान लगाया जायेगा ताकि यह पता चले कि इन लोगों ने मेरे शत्रुओं की मदद की थी ! जाहरवीर बाबा ने तो दिल्ली के बादशाह को माफ़ कर दिया पर जाहरवीर बाबा की माता ने जाहरवीर बाबा को माफ़ नहीं किया और उन्हें कहा कि आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना , तुने अपने ही कुल का नाश कर दिया


यह सुनकर जाहरवीर बाबा ने नीले घोडे पर सवार होकर घर छोड़ दिया पर उनकी पत्नी माता श्रीयल जाहरवीर बाबा से मिलने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने लगी ! रानी श्रीयल जालंधरनाथ जी की शिष्या थी ! जाहरवीर बाबा जी उनसे मिलना तो चाहते थे परन्तु अपनी माँ के वचन को भंग भी नहीं करना चाहते थे इसलिए जाहरवीर बाबा पंजाब के गाँव छपार आकर " सिद्ध सुलक्खन " जी से मिले ! सिद्ध सुलक्खन जी नाथ पंथी योगी थे और उनका सम्बन्ध जाहरवीर बाबाजी के खानदान से था ! वह ऐसी विद्या जानते थे जिसके द्वारा व्यक्ति धरती के नीचे चल सकता , किसी भी वस्तु का रूप धारण कर सकता था और किसी भी व्यक्ति की शक्ल धारण कर सकता था ! यह विद्या सिखने के लिए जाहरवीर बाबा पंजाब के गाँव छपार में रहे और जाते समय उन्होंने सिद्ध सुलक्खन जी से कहा जिस प्रकार मेरा मेला राजस्थान में भरेगा उसी प्रकार आपका मेला भी छपार में भरेगा ! आज इस स्थान पर बड़ा भारी मेला लगता है और यदि किसी के घर सांप निकलते हो या किसी की कुंडली में काल सर्प योग हो या नाग दोष हो या स्वपन में नाग नज़र आते हो तो इस स्थान पर चांदी के सांप चढाने से यह सभी दोष नष्ट हो जाते है और नागो की कृपा प्राप्त होती है !  

एक बार इस नगर के मुस्लिम नवाब ने इस मेले पर रोक लगा दी तो एक साथ उसके अनेको घोडे मर गए ! यह देखकर नवाब ने कहा कि यह मेला दोबारा शुरू करो और पहले से भी बड़ा मेला लगवाओ ! पहले इस स्थान पर केवल सिद्ध सुलक्खन जी का स्थान था पर सन १८९० में कुछ लोग राजस्थान के बागड़ प्रान्त से जाहरवीर बाबा के दरबार की मिटटी और ईट का जोड़ा लेकर आये और जाहरवीर बाबा की समाधी का निर्माण कर दिया

यदि किसी को साँप ने काट लिया हो या साँप का विष लगने से शरीर का कोई अंग गल गया हो तो इस स्थान पर माथा टेकने से ठीक हो जाता है और इतना ही नहीं यदि कोई साँप का काटा व्यक्ति इस गाँव की हद में जाए तो विष उसी समय उतर जाता है और दर्द बंद हो जाता है ! इस स्थान पर बहुत से लोगों में नाहरसिंह वीर और साबल सिंह वीर की सवारी भी आती है ! यह एक सिद्ध स्थान है और यहाँ पर प्रत्येक इच्छा पूर्ण होती है ! जो फल राजस्थान में जाहरवीर बाबा और गुरु गोरखनाथ जी के दर्शनों का है , वही फल इस स्थान पर जाहरवीर बाबा के दर्शनों से प्राप्त होता है !


आप सब भी एक बार इस सिद्ध स्थली के दर्शन अवश्य करे और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करे !!

जय सदगुरुदेव !!!

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