बाबा वडभाग सिंह का स्थान हिमाचल के जिला ऊना में है!उनका जन्म गुरु गोविन्द सिंह जी की सातवी पीढ़ी में विक्रम सम्बत 1762 में पंजाब के जिला करतारपुर में हुआ था!आपके पिता का नाम राम सिंह जी था और आप अपने पिता के एक ही पुत्र थे!आपकी बहन का नाम बीबी भानी था!आपने अमृत का पान किया और संत सिपाही की भूमिका निभाई!आप संगत को नाम सिमरन का उपदेश देते और जन्म मरण से मुक्ति के लिए प्रयत्न करने को कहते थे!एक बार करतारपुर पर लाहौर की फ़ौज और जालंधर के हाकिम ने हमला कर दिया और एक गुरूद्वारे का अपमान कर दिया!आपने दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया और संख्या में कम होते हुए भी आपने जालंधर के हाकिम को मार दिया और लाहौर की फ़ौज के सेनापति कुतबुद्दीन को जिन्दा जला दिया!आपने गौओ की रक्षा के लिए कई बार युद्ध किया!एक बार बाबाजी गगरेट के पास महेडी गाँव में एक बेर के पेड़ के नीचे बैठ गए!उस पेड़ के ऊपर नाहरसिंह नामक एक देओ ( एक तरह का जिन्न ) रहता था!बाबाजी को कई लोगो ने कहा इस जगह मत बैठो इस पेड़ पर नाहरसिंह जिन्न रहता है पर बाबाजी नहीं माने,बाबाजी ने कहा जो होगा देखा जायेगा!जब नाहरसिंह आया तो तरह तरह के रूप बनाकर बाबाजी को डराने लगा,बाबाजी ने कीर्तन सोहेला का पाठ कर अपने चारों तरफ एक घेरा बना लिया!नाहरसिंह ने बाबाजी पर बारिश आंधी छोड़ी और ईंट पत्थर बरसाए पर बाबाजी को कुछ नहीं हुआ!जब नाहरसिंह थक गया तो बाबाजी ने माता कालका से प्रार्थना की तो माता ने नाहरसिंह को पकड़ कर एक पिंजरे में बंद कर दिया!नाहरसिंह को बाबा बालकनाथ का वरदान था कि जब तक यह धरती रहेगी तुम्हारा अस्तित्व भी रहेगा क्योंकि एक बार नाहरसिंह ने शेर का रूप बनाकर एक बालक को खा लिया था तो बाबा बालकनाथ जी ने नाहरसिंह को उस बालक को जीवित करने को कहा,नाहरसिंह ने बाबा बालकनाथ जी के डर से उस बालक को जीवित कर दिया और बाबा बालकनाथ जी से कहा कि यह मेरा भोजन है मै क्या खाऊंगा तब बाबा बालकनाथ जी ने कहा कि ठीक है मेरे स्थान पर जो भी भूत प्रेत से दुखी व्यक्ति आएगा तू उस पर सवार भूत प्रेत को बंधक बना लेना और लोग तुझे मेरे नाम पर बकरा चढायेगे पर उस बकरे की बलि नहीं दी जाएगी तू केवल उस बकरे की खुशबू से अपने आप को तृप्त करेगा और जब तक यह सृष्टि रहेगी तब तक तेरा अस्तित्व भी रहेगा!जब बाबा वडभाग सिंह ने नाहरसिंह को क़ैद कर लिया तो नाहरसिंह ने कहा बड़ा आया बाबा बालकनाथ कह रहा था तेरा अस्तित्व कभी खत्म नहीं होगा अब इसने मुझे क़ैद कर लिया है और जिस दिन मेरे बाकी तीन भाई इसके हाथ आ गए यह मुझे नरक भेज देगा!नाहरसिंह की पुकार सुनकर बाबा बालकनाथ जी छोटे बालक का रूप बनाकर बाबा वडभाग सिंह जी को मिले और कहा जब तक यह धरती पर रहेगा खायेगा मेरा और काम तेरा करेगा पर इसे मारना मत,बाबा वडभाग सिंह जी ने उनकी बात मानली!आज उस स्थान पर हर पूर्णिमा और अमावस को बड़ा भारी मेला लगता है दूर दूर से भूत प्रेत से दुखी लोग आते है और जब उन्हें धौली धार ( एक झरना इस झरने पर नाहरसिंह का पहरा है
मन्त्र::-
करतारपुर करता वसे,
चढ़ी आवे लत्थी जावे,
अक्खी घटा मुह वीच गट्टा,
बिडबिड तक्के बोल न सके,
गुरु हरराए साहिब जी दा सदका,
बाबा वडभाग सिंह जी ने मारे धक्के!
विधि::-
प्रयोग विधि ::- जब कोई भूत प्रेत की समस्या वाला व्यक्ति आये तो गूगल इस मन्त्र से अभिमंत्रित कर उस व्यक्ति को सूंघाए!उस व्यक्ति पर सवारी आ जाएगी और पूछने पर सब कुछ बता देगी कि उसे किसने भेजा है कहाँ से भेजा है!आप उस से पूछे कि अब इस इन्सान को छोड़ने का क्या लोगी तो वे अपनी मनोकामना बता देगी यदि कोई भूत प्रेत ऐसी कामना कहे जिसे पूरा करना असंभव हो तो आप इसी मन्त्र से अभिमंत्रित जल उसे पिलाये और जैकारा धौलीधार वाले का कहे वे भूत प्रेत उसी समय शांत हो जायेगा!इस अद्भुत साधना से आप अपना और दुसरो का कल्याण करे ऐसी मेरी परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है!


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