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पद्मावती साधना

 

 
देवी पद्मावती साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा ही है ! माँ पद्मावती की साधना करने से भी वही फल मिलता है जो माँ लक्ष्मी की आराधना से मिलता है ! जिस प्रकार माँ लक्ष्मी की पूजा दिवाली की रात्रि से करना बहुत शुभ मन जाता है उसी प्रकार माँ पद्मावती की पूजा के लिए भी दिवाली की रात्रि बहुत उत्तम मानी जाती है ! माँ पद्मावती यदि प्रसन्न हो जाये तो जीवन में कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं रहता ! माँ पद्मावती की आराधना अधिकतर जैन समाज के लोग करते है ! उनका मानना है माँ पद्मावती साक्षात लक्ष्मी ही है ! यह साधना मुझे गुरुदेव से दिवाली के अवसर पर प्राप्त हुयी थी और इस साधना को मैंने आज तक जिस जिस को भी करवाया है उसके जीवन में आमदन के नए रास्ते खुल गए ! जो लोग धन के अभाव से पीड़ित है वो एक बार इस साधना को अवश्य करे ! मुझे पूर्ण विश्वास है इस साधना को करने के बाद उनके जीवन में धन का अभाव नहीं रहेगा !




|| विधि ||
इस साधना के लिए आप किसी कुम्हार से थोड़ी चिकनी मिटटी ले आये और उस मिटटी से 119 गोलिया बनाकर उसे धूप में सुखा ले ! दिवाली की रात में लक्ष्मी पूजन के बाद एक बाजोट पर लाल कपडा बिछाकर उस पर जौ की ढ़ेरी बनाकर उस पर एक घी का दीपक जला दे , धुप अगरवती दिखाकर उस पर गुलाब का फूल चढ़ाये और इस मन्त्र का 11माला जाप करे ! मन्त्र जाप गिनने के लिए मिटटी की बनाई उन गोलियों का प्रयोग करे
एक तरफ  ११ गोलियाँ  रखे और एक तरफ 108 गोलीया रखे ! इस प्रकार 11 माला की गिनती पूर्ण करे ! इस साधना को पूरे 43 दिन करे ! 43 दिन पूरे होने के बाद सारीं सामग्री बहते पानी में बहा दे और अगर हो सके तो गोलियाँ संभाल कर रख ले और हर रोज 1 माला जाप करले !
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मन्त्र ||
पद्मावती पद्माकुंशी वज्र वज्राकुंशी प्रत्यक्षम भवति भवति !
इस साधना से माँ पद्मावती का दर्शन भी हो जाता है

माँ पद्मावती आप सब पर कृपा करे यही हमारी कामना है ! 

जय सदगुरुदेव !!

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