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रखता वीर साधना

 वीर साधनाओ में रखता वीर का स्थान बहुत ऊँचा माना जाता है ! उनकी साधना के बाद व्यक्ति खबीस और प्रेत बाधाओं से दुखी लोगो का इलाज बड़ी सरलता से कर सकता है ! वीर उसकी आज्ञा मिलते ही कार्य कर देता है ! केवल प्रेत बाधा ही नहीं यदि वीर प्रसन्न हो जाए तो जो भाग्य में नहीं है वो भी दे देता है ! ऐसा कोई कार्य नहीं है जो इस साधना के बाद दुर्लभ हो ! मारण मोहन आदि सभी कार्य वीर सिद्ध करता है ! इसके इलावा शत्रुओं का भी सर्वनाश हो जाता है ! इस वीर के विषय में कहा जाता है कि जब इनका जन्म हुआ तो यह जन्म लेते ही बोलने लगे और अपनी माता से कहा - "मेरे जैसा कौन बलवान है जो पैदा होते ही बोलता हो ?" ! इस पर उनकी माता ने कहा - "पुत्र घमंड नहीं करते, इस दुनिया में एक से एक बलवान है" ! इस पर रखता वीर ने कहा - "पैदा होते तो रामजी और कृष्णजी ने भी बोलना शुरू नहीं किया तो बताओ मुझ सा  बलवान कौन है ?" ! रखता वीर की माता ने कहा - "पुत्र तुमने तो पैदा होकर बोलना शुरू किया है पर बागड़ देश के गुग्गा जाहरवीर ने तो माँ के पेट में ही बोलना शुरू कर दिया था" ! यह सुनकर रखता वीर का घमंड टूट गया और वह गोगा जाहरवीर के सेवक बन गए ! रखता वीर गोगा जाहरवीर जी के घोड़े के पीछे चलते है ! यह साधना एक तीव्र साधना है और मेरी स्व अनुभूत है !


||  मन्त्र  ||

रखता वीर लै कर्द कलेजा चीर
मेरा वैरी तेरा भछ 
ताइओ मुड़ी पीके रत्त
चले मन्त्र फुरे वाचा 
देखां रखता वीर तेरी हाजरी का तमाशा !



||  विधि  ||

प्रतिदिन रात्रि 10 बजे आसन पर बैठे और आसन जाप और शरीर कीलन मंत्र पढकर रक्षा घेरा बनाएँ ! उसके बाद गुरु पूजन और गणेश पूजन करे और उनसे मंत्र जप की आज्ञा ले ! फिर अपने सामने उबले हुए चावलों में पांच चम्मच घी और पांच चम्मच शक्कर मिलाकर मिटटी के बर्तन में रखे और थोड़ी सी शराब भी मिटटी के बर्तन में रखे ! अब ऊपर दिए मंत्र का ढाई घंटे जप करे , जप के दौरान किसी भी हालत में रक्षा घेरे से बाहर ना आयें ! यह साधना किसी नदी के किनारे या उजाड़ स्थान में करे और इस पूरी क्रिया के दौरान गाय के घी का दीपक जलता रहना चाहिए ! यह साधना आपको 41 दिन करनी है !



||  प्रयोग विधि  ||

जब भी कोई काम करवाना हो तो इसी प्रकार मिटटी के बर्तन में सारी सामग्री और शराब उजाड़ स्थान में रखे और 11 बार मंत्र पढ़कर अपना कार्य बोल दे , आपका कार्य सिद्ध हो जायेगा ! यदि वीर प्रत्यक्ष हो जाएँ तो उसे जाहरवीर बाबा और गुरु गोरखनाथ जी की कसम खिलाकर अंगूठे पर स्थापित होने के लिए कहे और यह वचन ले कि जब भी मैं चुटकी बजाकर कोई कार्य कहूँगा उस कार्य को सिद्ध करना पड़ेगा !

चेतावनी - यह एक तीव्र साधना है इसलिए इसे गुरु आज्ञा से ही करे ! किसी भी तरह के फायदे और नुक्सान की जिम्मेदारी हमारी नहीं है ! 

जय सदगुरुदेव ...!!

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