हजरत अली जी के नाम से कौन वाकिफ नहीं होगा? वह स्वयं पैगम्बर मुहम्मद जी के दामाद थे और आपकी पत्नी का नाम बीबी फातिमा था ! आप को शेर-ऐ-खुदा भी कहा जाता है और कुछ लोग आपको शाह अली के नाम से भी जानते है ! इस्लाम के प्रचार और प्रसार में आपका महत्वपूर्ण योगदान था और आप पैगम्बर मुहम्मद जी के बहुत करीब थे ! मुस्लिम साबर मन्त्रों में हजरत अली से सम्बंधित बहुत से अमल है ! हजरत अली को सबसे ऊँचा पीर माना जाता है , क्योंकि पैगम्बर मुहम्मद जी के मुख्य शिष्यों में हजरत अली और ख्वाजा रत्न हाजी का नाम आता है ! ख्वाजा रत्न हाजी बहुत समय तक पैगम्बर मुहम्मद जी के साथ रहे थे ! फिर वह भारत आ गए और पंजाब के शहर भटिंडा में डेरा बनाया और इस्लाम का प्रचार भारत में शुरू कर दिया !
हजरत अली सारी उम्र पैगम्बर मुहम्मद जी के पास ही रहे और उन्होंने पांच चिस्ती खानदान चलाये ! इसी चिस्ती खानदान में आगे चलकर ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती और बाबा फरीद जैसे उच्च कोटि के मुस्लिम फकीर हुए जिन्होनें इस्लाम का खूब प्रचार किया ! कहा जाता है कि औरंगजेब सवा मन जनेऊ उतरवाकर फिर एक समय का खाना खाता था और धर्म परिवर्तन के लिए हिन्दुओं के साथ जुल्म करता था परबाबा फरीद ने प्रेम और करामात से अधिक धर्म परिवर्तन करवा दिया था !
यदि हजरत अली ना होते तो शायद इस्लाम का इतना प्रचार न होता और कहा जाता है कि " अली को देखा नबी को देखा, नबी को देखा खुदा को देखा " मतलब जिसने अली को देख लिया उसने खुदा को ही देख लिया यह कहना गलत नहीं होगा ! मेरे गुरुदेव सिद्ध रक्खा राम जी इस्लामिक साबर मन्त्रों के भी बहुत अच्छे जानकर थे; उन्होंने मुझे हजरत अली का डंका, हजरत
अली की ललकार और भी हजरत अली से सम्बंधित अनेकों अमल बताएं थे ! इस्लाम में पैगम्बर मुहम्मद के बाद जो स्थान हजरत अली का है वह शायद ही किसी और का हो ! मैं यहाँ एक ऐसा साबर मन्त्र दे रहा हूँ जिससे हजरत अली की कृपा प्राप्त की जा सकती है और इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद आप बड़े से बड़े भूत प्रेत और जिन्न से पीड़ित व्यक्ति का इलाज बड़ी आसानी से कर सकते है !
|| मंत्र ||
लाइल्लाहा की कोठरी ,
ईल अल्लाह की खाई ,
हज़रत अली की चौंकी , मोहम्मद रसूल इल्लाह की दुहाई ||
|| विधि ||
इस मन्त्र का हररोज सूर्य उदय के बाद मतलब सात वजे लगभग 101 बार जप करे !
|| प्रयोग विधि ||
जय सदगुरुदेव !!


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