कई बार ऐसा होता है की हम आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होते और हमारी इच्छाएं बहुत बड़ी होती है! उन इच्छाओं को पूरा करने के लिए हमारे पास प्रयाप्त धन नहीं होता,हमारी इच्छाएं अन्दर ही अन्दर दबकर रह जाती है! मेरे गुरुदेव का कहना था धन के अभाव में मानव धर्म का पालन भी नहीं कर सकता, क्योंकि चार पुरुषार्थों में एक अर्थ है! अर्थ धर्म का सहायक है और धर्म मोक्ष का सहायक है!धन से ही कामनाओं की पूर्ती होती है इसलिए धन काम का भी सहायक है! आज मै आपके सामने एक ऐसा ही प्रयोग रख रहा हूँ जो निश्चित रूप से आपकी समस्या का समाधान रने में सक्षम है और ये मेरा अनुभूत प्रयोग है!

जब मैंने धन की कामना से भगवान शिव के इस प्रयोग को शुरू किया तो मुझे अनेक प्रकार की अनुभुतिया हुई,लगभग तीसरे दिन ही जब मैंने मन्त्र जप के बाद आंख खोली तो सामने दीवार पर एक लाइन में सात नंबर लिखे हुए नज़र आये,मैंने उन नंबरों को एक गज़ पर लिख लिया और दुसरे दिन जब मैंने पता किया तो उनमे से एक नंबर सट्टे में खुल गया था,बाकि बचे हुए नंबर मैंने अपने दोस्तों को बाँट दिए और अगले छे दिन वोही नम्बरआते रहे!सबसे बड़ी बात ये साधना एक सोम्य साधना है और घर पर की जाती है यदि वीच में छूट जाये तब भी कोई नुकसान नहीं होता!

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